*कर्म करने का अवसर मिलना ही फल है

 




  • कर्म करने का अवसर मिलना ही फल है


जो बात आपके हाथ में है नहीं, उसका क्या तनाव लेना; जैसे प्रयास आपके हाथ में हैं लेकिन परिणाम बस में नहीं है तो फिर परिणाम को लेकर कभी तनाव ना पालें, रिजल्ट अच्छा मिले इसके लिए तो पूरी ताकत झोंक दें लेकिन आपके चाहे अनुसार ही मिल जाए इसे लेकर बहुत अधिक दबाव में ना आएं *…*..


परिश्रम करने में यदि तनाव आता है तो दिक्कत नहीं है लेकिन जब दबाव परिणाम पाने का हो तो परेशानी शुरू हो जाती है, आप जो कर रहे हैं उसमें फल की आसक्ति आपको अशांत कर देगी *…*..


अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो 12-12 घंटे काम करते हुए भी तनावमुक्त रहते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो एक घंटे में डिप्रेशन में डूब जाते हैं; जिन लोगों को यह बात समझ में आ गई कि कर्म और परिणाम अलग-अलग नहीं, बल्कि कर्म में परिणाम शामिल है तो कुछ समय बाद यह भी समझ आ जाएगा कि


*हमारा कर्म करना ही उसका फल है …*..


कोई काम करने का अवसर मिले तो आप उसी को रिजल्ट मानिए, तब तो तनाव में नहीं आएंगे लेकिन जैसे ही आपकी दृष्टि परिणाम पर पड़ी तो कर्म की नीति, उसकी सादगी सब धरी रह जाएगी *यहीं से तनाव शुरू होता है*; सूखा पत्ता पेड़ से खुद गिर जाता है, ऐसे ही जिंदगी में कुछ काम अपने आप होने दीजिए, परिश्रम करने का मौका मिला हो तो करिए और मानकर चलें कि परिणाम उसी में छिपा है; फिर देखिए बड़े से बड़ा काम करने के लिए करने के बाद


परिणाम में सफलता के साथ बोनस के रूप में शांति भी चली आएगी